Tuesday, April 6, 2010

प्रायवेट स्कूल्स २५%गरीब+ वंचितों को दाखिला देंगे यह सोच कर ही हसीं आती है|

शिक्षा का अधिकार अब कानून है|इससे देश भर में ३३% उत्तरप्रदेश में ३९%निरक्षरों को ना केवल अक्षर ज्ञान मिलेगा वरन  निशुल्क  एक से आठवीं कक्षा पास करा कर  उनका आत्मसम्मान भी बढाए जाने की उम्मीद जगी है|             स्कूल्स
                १-४-२०१० से शिक्षा का अधिकार कानून बना दिया गया है|इसके अंतर्गत  सभी स्कूलों में नज़दीक के गरीब व् वंचित तबके के  कम से कम २५%छात्रों को लेना  होगा| यदि यह सब ठीक ठाक चलता रहा तो २०२० तक वर्तमान १५%कालेज जाने वालों की संख्या ३०%तक पहुँच जायेगी|लेकिन ये आंकड़े वास्तविक धरातल पर मर्गतृष्णा ही लग रहे हैं|इस मार्ग में दूरबीन के बगैर भी कई अडचनें नज़र आ रही हैं|
              [१]वंचितों ,गरीबों को शिक्षा देने के लिए केंद्र सरकार ने ५५%धन उपलब्ध कराने की बात कही है|मगर कई राज्य अपने हिस्से के ४५% देने को  तैयार नहीं हो रहे|
[२]   सरकारी ९३% स्कूलों में [अ]बुनियादी सुविधाओं का सर्वथा अभाव है|[आ]शिक्षक छात्र अनुपात चिंताजनक है|[इ]शिक्षकों के गुट हैं और अपनी जायज नाजायज मांगों के लिय हड़ताल ही एक विकल्प है|
[३]आज़ादी के ६ दशक बाद भी १७००० गावों में स्कूल तक नहीं है|

यह भयावक स्थिती तब है जब की ९३%स्कूली व्यवस्था सरकार के पास है|
[४]एक रिपोर्ट के मुताबिक़ देश में  तीन  और एक के अनुपात में कमरे उपलब्ध हें जबकि कक्षा का ओउसत ३५ है|
[५]कम्पूटर की पढाई पर जोर दिया जा रहा है जबकि इसका  १४.१२%रास्ट्रीय ओउसत है|
[६]कक्षा आठ के बाद कया होगा|यह यक्ष प्रश्न अनुतरित है|
            शायद इसी कारण से ड्राप आउट ज्यादा है|प्रायमरी में एक करोर चौंतीस लाख दाखिले लेते हैं मगर पांचवी तक एक तिहाई और आठ के बाद आधे बाहर हो जाते हैं|यह स्थिति रिसर्च तक चलती रहती है|
            शायद यही कारण है की सरकारी स्कूलों में बौधिकता प्राप्त करने के बजाय प्रायवेट स्कूलों में भोतिकता की ज्यादा मांग है|तभी हर साल इनके फीस की दर का ग्राफ १५% तक बड़ जाता है|एल के जी से लेकर मात्र पहली कक्षा तक में दाखिले के लिए  सीटों के मुकाबले १० गुना आवेदन आ जाते हैं|यहाँ तक की एल के जी में दाखिला दिलवाने को नन्हें मुन्हों परटूशन का भार भी अविभावक डाल देते हैं| इन स्कूलों में खेल के मैदान भी नहीं होते| टीचरों की तन्क्वाह भी सरकारी से बेहद कम होती है|फिर भी इनका क्रेज़ रहता है|अब ऐसे शिक्षण संस्थान अपने यहाँ २५%गरीब और वंचितों को दाखिला देंगे यह सोच कर ही हसीं आती है|

3 comments:

सीमा सचदेव said...

हंसी की बात है तो हंसी तो आएगी ही , चलो सोच-सोच कर हंसते रहिए...गरीब बच्चों के साथ

राज भाटिय़ा said...

ओ दिन डुबा जद घोडी चढ्या कुबा....

श्याम कोरी 'उदय' said...

...प्रभावशाली व प्रसंशनीय अभिव्यक्ति!!!