Wednesday, April 7, 2010

बहरे कानों को बहस से नहीं बम से खोलो

बहरे कानों को बहस से नहीं बम से खोलो यह कहते हुए शहीदे आज़म भगत सिंह ने सेन्ट्रल इम्पीरियल अस्सेम्बली में धमाका कर दिया

इससे पुरे विश्व का ध्यान भारत की समस्या की और हो गया
यह एतिहासिक घटना ८० वर्ष पूर्व बीते शतक में आज ही के दिन यानी आठ अप्रैल को घटी


सेन्ट्रल इम्पीरियल अस्सेम्बली में ट्रेड डिस्पुटबिल और पब्लिक सेफ्टी बिल पर गरमा गरम बहस चल रही थी
ट्रेड यूनियनों के माध्यम से मेरठ कांस्पीरेसी केस के अंतर्गत पकडे गए यूनियनों के नेताओं पर शिकंजा कसने की तैयारी थी इसके साथ साथ पब्लिक सेफ्टी के नाम पर विदेशिओं को भारत की जंगे आज़ादी से दूर रखने के मंसूबे थे
ट्रेड यूनियनों के मसले पर यह कहा गया कीजब केस मेरठ की अदालत में चल रहा है तब उस पर यहाँ बहस करना और उस पर बिल लाना बेमानी हे
मगर तत्कालीन ब्रिटिश सरकार दोनों बिल लाने की ठान चुकी थी इसी पर बहस के दौरान वोटिंग कराया गया तब ट्रेसरीऔर विपक्ष बेंचों के बराबर बराबर वोट पड़े इस पर स्पीकर विट्ठल भाई ने वोट से विपक्ष का पलड़ा भारी कर दिया इस बहस में देश के जाने माने वकील भी शामिल थे|मगर इस सबको दरकिनार करते हुए फायनेंस सेक्रेटरी शूश्टर ने बिल  को जरूरी बताते हुए इसे पास किये जाने की बात कही इस पर शहीद भगत सिंह ने हाल में बम फैंक कर बाहरी सरकार के कान खोल कर भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में नै जान फूंक दी|