Saturday, December 12, 2009

छोटे राज्यों के विषय में टालमटोल घातक होगा

कुकुरमुत्तों जैसे उत्पन्न हो रहे राजनीतिको की
एकमुट्ठी आसमान की चाहत ने आज मुल्क को उस पर्यावरण[वायु मंडल]] में धकेल दिया हे जहाँ चारों और आशंकाओं की खतरनाक गैसें रास्ट्रीय एकता की ओजोन परत पर छेद दर छेद किए जा रही हैं

अपनी प्रधानी कायम रखने के लिए छोटे राज्यों की मांग वैसे तो बीती सदी के प्रारम्भ से ही उठनी शुरू हो गयी थी आधी सदी के आते आते धरम के नाम पर देश के दो टुकड़े हुए फिरआधी सदी बीतने पर भाषा को आधार बनाया गया मौजूदा सदी के प्रारम्भ में फ़िर इतिहास अपने को दोहराने लग गया हैअब छेत्र वाद को आधार बनाया जा रहा है

प्रथक तेलंगाना +हरितप्रदेश+गोरखालैंड+बुंदेलखंड+बोडोलैंड+तमिल नाडू +विधर्भ

+++++++++ की मांग जोर पकड़ रही है नारा है की छेत्र के विकास के लिए छोटे प्रदेश जरूरी हैं

कुछ छोटे प्रदेश जैसेउत्तरांचल+ हरियाणा+हिमाचल+ अपवाद हो सकते हैं मगर झाड़खंड+असाम के राज्यों ने एक वीभत्स चेहरा भी पैदा किया है चंडीगढ़ का विवाद अभी तक अनसुलझा हैप्रदेशों में पानी का बटवारा अभी तक नही हो सका है

छोटे राज्यों का गठन [विकास के लिए] होने पर भी राज्य देश में ही रहेगा इससे किसी को कोई ऐतराज नही होगामगर विभाजन के बाद भी विकास तो छोड़ो शान्ति ही भंग होने लगी तो ऐसे विभाजन से तो तौबा ही भली इससे तो वर्त्तमान महंगाई+बेरोजगारी+भ्रष्टाचार+सीमा पर तनाव+अयोध्या+गन्ना संकट+++++++जैसे अनेक मुद्दे पाश्र्व में चले गए हैं
केन्द्र सरकारों का टालने वाला रवय्या छेत्रों में असंतोष पैदा करता है असंतोष से आक्रोश उपजता हैआक्रोश से उत्पन्न विद्रोह कभी कभी क्रान्ति का रूप भी ले लेता है

Friday, November 13, 2009

बाल दिवस १४ नवम्बर



अपनी जवानी+अधेडावस्था में भारत की आज़ादी के लिए जंग लड़ कर पहले पी.एम्.बनने वाले जवाहर लाल [चाचा]नेहरू के १२०वे जन्मदिवस को बाल दिवस के रूप में मनाया जारहाहैशिषणसंस्थाओं में फैंसीड्रेस शो हो रहे हैं कुछ संस्थाओं में माह का दूसरा [१४११२००९]शानिवासरिया अवकाश के कारण एक दिन पहले [१३११२००९]ही बाल दिवस मनायागया केन्द्र [विशेषकर]सरकार के मंत्रालयों ने भारी भरकम विग्यापनछपवा कर नेहरू+केन्द्र सरकार के प्रति कृतघ्नता प्रगट की इसके साथ ही मीडिया में आने के... लोभ में भी कई संस्थाओं में भी बाल क्रीडाओं का आयोजन हुआबीते दिन सोणे पी।एम्. ने बच्चोंके समक्ष चिंता व्यक्त करते हुए स्वीकार किया की देश में आज भी शिक्षाछेत्र में नयी सोच को तरजीह नहीं दी जा रही गौरतलब हे की भारतीय स्लम डोगों को अपने ही मुल्क में सम्मान जनक रूप में नोबेल प्राइज़ पाने लायक बना कर देश में लोकतंत्र के संस्थापकों को सच्चे श्रधा सुमन अर्पित करने का समय आ गयाहे

अब शिक्षा में नयी सोच और बाल दिवस में संबध स्थापित किया जाना देश हित में भी जरूरी हो गया है

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Tuesday, November 3, 2009

भ्रष्टाचार उन्मूलन सप्ताह आज से ?सतर्कता जागरूकता सप्ताह

देश से भ्रष्टाचार के कलंक को मिटाने के लिए सरकारी कार्यालयों में [देश के लोक सेवकों द्वारा ]निर्बाध रूप से कार्य करते हुए इमानदारी से सिधांतों पर आधारित सेवा प्रदान करने को शपथ ली जा रही हेमुख्यसतर्कता आयोग के दिशा निर्देश का पालन करते हुए विभागों [केन्द्र सरकार विशेष]में भ्रष्टाचार उन्मूलन सप्ताह मनाया जा रहा हेसरकारी[केन्द्र]विभागों में विशेष तौर पर ६ दिन का सप्ताह होता हे यह सप्ताह २नोवेम्बर से ६नोवेम्बर तक मनाया जाना हे मगर इस बार पहली और दूसरी नोवेम्बर को अवकाश रहा सो यह विशेष सप्ताह मात्र चार दिन का ही रहाइसीलिए चार दिन की चांदनी माफ़ कीजियेगा चार दिन की [मात्र]सतर्कता बरतने की जरुरत हे सतर्कता जागरूकता सप्ताह
विभागों में नए बोर्ड लगाने का सौभाग्य मिल रहा हेशपथ ग्रहण समारोह मना कर मीटिंग करने का मौका हेप्रतिज्ञा ली जा रही हैंइसमे बड़े बड़े शब्दों का प्रयोग किया जा रहा हैबानगी देखिये
[१]कार्यकलापों में सत्यनिष्ठा +इमानदारी+पारदर्शिता+आदि से भ्रष्टाचार उन्मूलन को निर्बाध रूप से कार्य करेंगे
[२]सिधांतों पर आधारित सेवा प्रदान की जायेगी
[३]सामूहिक प्रयासों से संघठनों को गौरवशाली बनाया जाएगा
[४]भय और पक्षपात के बिना कार्य करेंगे
देश की वर्त्तमान दशा के मद्दे नज़र यह अपने आप में एक अच्छा+सकारात्मक+प्रेरक प्रयास हे मगर इसके नतीजे उत्साहवर्द्धक नही कहे जा सकतेकारण
[अ]पुराणी कहावत हे की जैसा राजा वैसी प्रजाअब राजा वर्ग [झारखंड]राजनितिक सहयोग के लिए भ्रष्टाचारी हे
[आ] मलाई दार विभागों के बंटवारे को बंदरबांट है[महारास्ट्रा]
[इ] पत्रकारिकता बिकाऊ है
[ई] न्यायधीशों को अपनी संपत्ति घोषित करने को बाध्य किए जाने की जरूरत हो गई है
[उ] बाड़ पीड़ित कर्नाटका में वर्चस्व की लड़ाई
[ऊ]विपक्ष निष्क्रिय हे
इसीलिए शायद स्वर्गीय राजीव गांधी पैसे का पूरा उपयोग नही देख सके उनके अपने कर्मठ पुत्र राहुल गांधी को तो सरकारी धन का उपयोग और भी कम दिखाई देता हैदेश में सबसे अधिक तनख्वाह पाने वाले भी मंदी के मौजूदा मौसम में हड़ताल के संक्रमण से ग्रसित हे या निम्न सरकारी नियमो का पालन कर रहे हैंबने रहो पगलाकाम करेगा अगलाबने रहो लुल पे पाओ फुलपालोगे टेंसन फमिली will take pension।
भ्रष्टाचार मिटे तो सबके लिए ठीक होगा

Friday, October 30, 2009

इंदिरा गांधी का स्मरण +नमन+श्रधासुमन ३१ओक्तूबर


पहली बार सरकार खोने के बाद एक बार प्रियदर्शनी मेरठ से होकर गुजरी खुली जीप में [एक दम] तनी हुई उन्हें देखने मात्र को मेरठकालेज के बाहर विशाल भीड़ सड़क के दोनों और कतार लगाए थी कोई भाषण नहीं \ कोई नारा नहींसमर्थक +विरोधी+श्रोता+दर्शक यहाँ तक मुख्य आकर्षण भी मौन इस मौन भाषा में सभी कुछ कह दिया गयाइंदिरा जी की विशाल आँखे अपना कसूर पूछ गयी और दर्शकों ने अपना कसूर स्वीकारा चुनावों में करारी हार के बावजूद [l.k.advaaniki tarah]हताशा की बजाए आत्म विश्वाश +दुबारा ज़ंग लड़ने का जज्बा ज्यादा था.इसके बाद चुनाव फ़िर हुए मगर जनता पार्टी के बजाए कांग्रेस [इंदिरा कांग्रेस] को पुनः सत्ता [जनता जनार्दन ने]सौंप दी गई

हमारा परिवार मुल्क विभाजन के बाद से ही जनसंघ के प्रति उदारवादी रहा है मगर तत्कालीन जनता पार्टी के एक घटक के रूप में चुनावी समर में उतरी जनसंघ के प्रति कोई लगाव नही दिखा

आश्चर्यजनक रूप से जब मेरी पत्नी वोट डाल कर आई तो मुझे विशवास था की यह तो परिवार की परम्परा का निर्वाह कर के ही आई होगी मगर घर में घुसते ही उसने कहा मै तो इंदिरा को वोट डाल आई आप ने किसे वोट दिया

उस समय में मौन सभ कुछ कह रहा था

Sunday, October 18, 2009

दीपावली सब के लिए शुभ हो|


अबकी दीपावली सबके लिए शुभ ही रही व्यापारिओं से लेकर कर्मिओं तक सभी की पौ बारह ही दिखाई दीयह पिक्चर केवल २०%देश वासिओं की ही कही गई हे[शेष के लिए दीपावली हमेशा की तरह ही रही]शायद इसी लिए सब तरफ़[ त्यौहार पर] बाजारवाद हावी रहाइस बाजारवाद में त्यौहार की परम्परा+पवित्रतता +प्रस्तुतिऔर प्रासंगिगता पर स्वाभाविक प्रश्नचिन्ह लगाए गए हैंबाज़ारवाद के लिए काला धन के साथ साथ मीडिया भी उत्तरदायी हे

अमेरीका में आर्थिक मंदी के पीछे बाजारवाद ही था मगर भारत में सदिओं से उत्सव प्रिय रहा हे अतःयहाँ लोग बाज़ार के हाथों लुटने के बजाये उसका उपयोग करना बखूबी जानते हैंयही कारण हे की इस ऐतिहासिक उत्सव पर मंदिसुर के दर्शन नही हुएयहाँ लोगों ने बाज़ार को अपने लिए बखूबी इस्तेमाल किया

मेरा बड़ा बेटा अमेरीका में हे उसका त्यौहार पर घर आना सम्भव नहीं हुआ सो हमारी श्रीमती जी ने कम्पूटर आन किया वेब कैमरा चालु किया और हेड फ़ोन लगा कर बेटे को ऑन लाइन करके पूजा की

बेशक अमेरीका हमसे कहीं अधिक विकसित हे मगर हमसे १२५ घंटे पीछे ही हे इसी कारण यहाँ रात्रि में पूजन हुआ तो वहाँ सुबह ही बेटेश्री को इसका लाभ उठाना पडा

Saturday, October 3, 2009

पीडितों के लिए राजनीति नहीं मदद इकट्ठा करो

आज रविवार हैआश्चर्यजनक रूप से पावर कट भी [१२ बजे]नहीं हैआसमान पर हलके बादल रवि के प्रभाव को कम कर रहे हैं और दिल फरेब मौसम के आगमन की सूचना से मिस गाइड भी कर रहे हैंलुब्बे लुबाब ये है की सब कुछ मिला कर मौसम ठीक ठाक हैचाय की चुस्किओं के साथ पकोडिओं की फरमाईश परिवार की तरफ़ से है
इस सबके ठीक उल्ट यानी मौसम के स्वभाव के विपरीत दिल कुछ उदास है कल रात तक टीवी चैनल्स
और अब सुबह सुबह प्रिंट मीडिया बिहार में नर संहार और साउथ में [आन्ध्र प्रदेश+गोवा+महारास्ट्र+कर्णाटक]प्राकृतिक बारिश + बाड़ से हुए तबाही का दुःख भरा समाचार दे रहे हैंजान और माल की बड़ी तादाद में हुई हानि के समाचारों से +ह्रदय विदारक [पीडितों के] चित्रों से कथित नैसनल +लोकल+]अखबार भरे हैं
झल्ले की [१]इश्वर से कामना है की मृतकों की आत्मा को शान्ति प्रदान करें
[२]स्थानीय व्यापारिओं से अपील है की संकट का फायदा न उठाएं
[३]नेताओं से निवेदन है की इस दुःख पर राजनीति ना करें
[४]हो सके तो हेल्प इकट्ठा [एक जुट]करें

Thursday, October 1, 2009

महात्मा गांधी +लाल बहादुर शास्त्री के जन्म की मुबारकबाद

बचपन से सुनते आ रहे हैं की आजहैदोओक्टूबर का दिन आज का दिन हे बड़ा महानआज के दिन दो फूल खिलेजिनसे महका हिन्दुस्तान [१]मोहन दास चंद गांधी [२]लाल बहादुर शास्त्री
लेकिन इनमे से एक महात्मागांधी को ही मार्केटिंग के लायक समझा गयायुद्घ की विभीषिका और अन्न संकट से देश को उबारनेवाले लाल बहादुर शास्त्री को पुत्र +पार्टी +पत्रों[समाचार]ने भी उचित सम्मान के लायक या मार्केटिंग सामान नहीं समझा गांधी के पत्रों से शुरू करके उनके मकान तक को नीलाम करने की होड़ हेटूटी फूटी पेन्सिल से कागज़ के टुकडों पर संदेश लिखने वाले नगेफ़कीर के नाम पर आज लाखों की कीमत के पेन बिकाऊ हेंसूती लंगोटी में ही देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले साबरमती के संत के नाम लेवा आज सादगी के नाम पर नाक सिकोड़ते दिखाई देते हेंबिना दफ्तर के ही आजादी का देश व्यापी आन्दोलन चलाने वाले बापू के देश में अतिआधुनिक दफ्तर बनाए जा रहे हेंरक्षा उपकरण हो या न हों स्टाफ हो या न हों रक्षा और उसके सहयोगी दफ्तरों में वातुनुकूलिक माहौल में लगातार बढोतरी होना लाज़मी हेशायद इसीलिएALL TIME GREAT महात्मा गांधी की मूर्ति के माथे पर चिंता की लकीरों की संख्या में [ आज उनके जन्म दिन पर ]बढोतरी देखी गयी JHALLEVICHAARAANUSAAR THIS THE PROPER TIME TO CORRECT THE PREVIOUS MISTAKES AND GIVE DUE SAMMAAN TO ALL AND OBSERVE AUSTERITY IN ITS TRUE SPIRIT