Friday, April 17, 2009

कूडा फैलाने वाला पागल बननाहै या कूडा हटाने वाला

आज सुबह माल रोड पर वाकिंग करते हुए एक पागल की अजीबोगरीब पग्लाहत देखीउसे देख कर वोह पागल कम और दार्शनिक ज्यादा और मैं ख़ुद को एक पागल समझ रहा हूँमैले कुचेले कपडे ,लंबे,रूखे बालों वाली एक डरावनी शक्शियत सामने से आती दिखाई दी इधर उधर हाथ फैकता हुआ वोह अपने आप कुछ बडबडा रहा थाउसे देख कर दो मोर्निंग वाकर्स घबरा कर वाकिंग स्ट्रिप[ पदेस्त्रियन्सके लिए बनी पट्टी ] से उतर कर मैं माल रोड पर आगई इस अप्रयाशी,अचानक सीन परिवर्तित होता देख मैं भी कुछ ठिठका इससे पहले आंखों ने जो देखा वह दिमाग को कोई संदेश दे पाता उस ,पागल से दिखने वाले ,शख्श ने माल रोड पर फैकीहुए प्लास्टिक की खाली बाटल को उठाया और कुछ बुदबुदाते हुए उसे दूसरी और पड़े कूड़े के ढेर पर उछाल दिया बिना किसी की और देखे या कुछ बोले आगे निकल गया
तभी से यह प्रश्न दिमाग मैं कौंध रहा है किपागल कौन है ?
[१]जिसने माल रोड पर गंदगी फैलाई
[२]जिसने देख कर भी बाटल नहीं उठाई
[३]जिसने बाटल उठा कर कूड़े मैं फैकी
ब्लागर मित्रों से इस झल्ले का निवेदन है कि झल्ले का मार्ग दर्शन करते हुए अपने विचारों सेझल्ले को अवगत कराएँ

5 comments:

Anil said...

ज्वलंत उदाहरण! सफाई में ही भगवान का निवास है!

Babli said...

मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !

Dr. Munish Raizada said...

जे जे साहेब:
यकीनन आपने अपना असली नाम सब से छुप्पा रखा है. मिशन इंडिया फाउंडेशन पर आपकी टिपण्णी के लिए धन्यवाद. आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा.

Everymatter said...

in our society the number of people spreading waste is increasing everyday and people who clean it very very less

it is a good article which raise a question for every individual?

mark rai said...

sabse pahle to aapko shukriya ki aapne mere lekh prithvi diwas ka majaak par achchha comment kiya..

sir ham to chaahte hai ki ham kuda saaf karne wala paagal hi bane ...iska apna alag maja hai ...