Saturday, April 25, 2009

प्रेम खुसबू पवित्र खुसबू

सर्वत्र प्रेम खुसबू जिसने पाया पछताया
जिसने नहीं ,वोह बेचारा ज्यादा पछताया
यह प्रेम खुसबू
करती है तंग
जब नहीं
होता प्रेम रूबरू

3 comments:

Babli said...

बहुत बहुत शुक्रिया आपकी खुबसूरत पंक्तियों के लिए!
बहुत ही सुंदर लिखा है आपने!

mark rai said...

सर्वत्र प्रेम खुसबू जिसने पाया पछताया
जिसने नहीं ,वोह बेचारा ज्यादा पछताया.....
बहुत ही सुंदर .....शुक्रिया ...
aapka aashirwaad chahiye....abhi to shuruaat hai ek din kichad jarur saaf kar dege...

Everymatter said...

very nice poetry

prem jo kara vo pachtaya or jo na kara vo bhi pachtaya