Thursday, November 6, 2008

गंगा स्नान पर गंगा रक्षा का व्रत लें

गंगा स्नान १३ नवम्बर को है इस वार्षिकोत्सव मे भागेदारी के लिए गंगा मैया मैं डुबकी लगाने के लिए सरधालू, उत्सव प्रेमी और व्यापारी गण गंगा मैया की तरफ़ चल निकले हें सदियों पुरानी आस्था का जादू लोगों के सर पर सवार दिखाई दे रहा है
भागीरथी की गंगा मैया पर कभी फ़िल्म मेकर राज कपूर {अब स्वर्गीय } को भी नाज़ था उन्होंने भारतियों की भावनाओं को एक गाने मैं पिरो कर कहा था की हम उस देश के वासी हें जिस देश में गंगा बहती हे इन्ही राज कपूर को स्वर्ग धाम जाने से पहले वोही गंगा मैया मैली दिखाई दी राम की गंगा के मैल को जब सिनेमा के परदे पर दिखाया गया तो बवाल भी मचा तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी {अब स्वर्गवासी } ने गंगा मैया के मैल को धोने की घोषणा भी की वाराणसी के तत्कालीन जिलाधिकारी ने गंगा गार्डस तैनात करवाए ,थोरे समय के बाद योग गुरु स्वामी रामदेवने हिंदू विचार्धारियोंसाथ मिल कर मोक्ष दायनी गंगा मैया के कल्याण के लिए मुहीम चलायी
अब प्रधान मंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने आश्चर्यरूप से गंगा मैया को नेशनल हेरिटेज घोषित कर दिया है
इन ढेरों प्रयासों के उपरांत भी गंगा मैया के जल को स्वछ करने के लिए कोई जमीनी गतिविधियाँ नज़रों से ओझल हें हरिद्वार तक के जल को भी धार्मिक अनुष्ठानों तक के लिए उपयुक्त नही समझा जा रहा
उतराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश ,हरियाणा से लेकर बंगाल तक के बाशिंदों के लिए गंगामैया जीवनदायनी है मानव के जनम से लेकर अंत तक के संस्कारों के अलावाउपरोक्त दिशाओं की खेती और खाने पीने के लिए गंगा मैया का ही आसरा है
दुर्भाग्य वश जीवन दायनी गंगा मैया से सब वसूलने वाले गंगा मैया को देने से गुरेज़ करते हें आज भी केवल भाषण बाजी ही हो रही है
अब तो राजनीति भी शुरू हो गई है भारतीय जनता पार्टी वाले गंगा जल को चुनावी मुद्दा बनाने में डूबे थे तो अब कांग्रेस ने यह मुद्दा हाई जैक कर लिया है
इस सारी उठा पटक से अनजान हमारी प्रिय जनताने समूहों में गंगामैया की राह पकर ली है आस पास के ग्रामीण इलाकों से विशेषत्या बैल गारियों को सजा सवार कर लोक गीत गातेआपनी ही धुन में मस्त चले जा रहे हें मुह अंधेरे अपने गंतव्य को निकले इन उत्सव प्रेमियों के मुह से निकल रहे लोक गीतों के साथ साथ बैल ,भैसों के गलों मेंबंधे घुंघरुओं की झंकार और पशुओं के पेरों मे लगी नाल की खट खट सुबह सवेरे की निस्बद्तता को चीरते हुए गंगा स्नान के आगमन की सुचना भी दे रहे हें
झल्ले विचारानुसार गंगा मैया से लेने वालों को अब {बेशक सरकारी सहयोग से ही सही } गंगा मैया को {थोरा सा ही सही }देने को भी पहल करनीहोगी यह समय की मांग हे हिन्दुस्तानी बन कर हिंदुस्तान की माँ की रक्षा को आगे आना होगा यह अपने अस्तित्व के लिए भी जरुरी है अपनी माँ को एक गंदा नाला भर बनने से रोकना अपनी इज्जत के लिए भी जरुरी है इसी लिए गंगा स्नान पर अपने ही मोक्ष के लिए ही सही गंगा मैया की रक्षा का व्रत लें अपने पूर्वजों की आत्मा को शान्ति और आने वाली जेनेरसनों के सुख की व्यवस्था कर ही लें

5 comments:

रचना गौड़ ’भारती’ said...

भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है ।
लिखते रहें ,लिखने वालों की मन्ज़िल यही है ।
कविता,गज़ल व शेर पढ़्ने के लिए मेरे ब्लोग पर सादर आमंन्त्रित हैं ।

Abhishek said...

इस विषय पर मैंने भी 'भड़ास' पर लिखा है. माँ गंगा की संतानों ने अब उन्हें इस जगत के माया-मोह से मुक्ति देने की ठान ली है. मैं तो अब उनकी शांतिपूर्ण मोक्ष की ही कामना करता हूँ. स्वागत ब्लॉग परिवार और मेरे ब्लॉग पर भी.

Amit K. Sagar said...

ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. खूब लिखें, खूब पढ़ें, स्वच्छ समाज का रूप धरें, बुराई को मिटायें, अच्छाई जगत को सिखाएं...खूब लिखें-लिखायें...
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आप मेरे ब्लॉग पर सादर आमंत्रित हैं.
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अमित के. सागर
(उल्टा तीर)

Abhishek said...

भड़ास पर टिप्पणी के लिए धन्यवाद. मेरे ब्लॉग पर भी आगमन बनाये रखें.

Yamini Gaur said...

Very nice ! bahut accha likha hai!

You are Welcome to my blog!
www.chitrasansar.blogspot.com