Saturday, July 17, 2010

पेड़काटे जाते हैं काटे जा रहे हैं क्या इसका कोई सुरक्षित विकल्प है ?व्र्क्षाम देहि


ग्लोबल वार्मिग और ग्रीन गैसेस की चिंता पूरे विश्व को खाए जा रही है लन्दन में साइकल तो दिल्ली में सोलेरिक्षा का प्रयोग मेरठ में पौधा रोपण समारोहपूर्वक हो रहे हैं लेकिन इसके साथ ही विकास की अंधी रेस में खेतों उर बागों की बलि भी दी जा रही है यह पर्यावरण के लिए सुरक्षित नहीं कहा जा सकता इस फोटो में मेरठ में नए भवनों के लिए चयनित भूमि को समतल और भवन बनाने लायक बनाने के लिए लकडहारे की कुल्हाड़ी और व्यवसायी का आरा गति पकड़ता जा रहा है यहाँ तक की एक तरफ पाइन डिवके पौधा रोपण समारोह में मेज़र ज़नरल पौधा रोप रहे थे तो दूसरी और महज़ २ किलो मीटर की दूरी पर सेनिक छेत्र में ही लकडहारा अपना कुल्हाड़ा पेड़ों पर चला रहा था
        .  छावनी छेत्र में पौधें समारोहपूर्वक रौपें जाते हैं शायद इसीलिए देश के ६२ छावनियों में पर्यावरण संतुलित नज़र आता है यहाँ तक की खुद मेज़रज़नरल रेंक के अधिकारी भी समारोहपूर्वक  पौधे रौपते हैं लेकिन बीते कुछ महीनों से यहाँ विकास की तेज़ आंधी चल  रही है जिसके फलस्वरूप हरे भरे पेड़काटे जा रहे हैं मेरठ भी इससे अछूता नहीं है यहाँ सेना के उपयोग के लिए जमीन चाहिए बाज़ार के नज़दीक चाहिए समतल  चाहिए लेकिन छावनी में अधिकाँश भूमि हरी भरी है व्रक्षों से भरी है मगर विकास चाहिए तो जमीन भी चाहिए सो ऐसी भूमि पर लगे पेड़ तो काटने लाज़मी हो जाते हैं इसके लिए बाकायदा प्लान बनता होगा पास होता होगा कटाने वाले पेड़ों कॉ चिन्हित किया जाता होगा इसके लिए अधिकारिओं कॉ बोर्ड बनता होगा पेड़ों की नीलामी होती होगी और उस नीलामी से हुई आमदनी खजाने में जमा भी होती होगी इस सारी प्रक्रिया पर कोई प्रश्न चिन्ह नहीं लग सकता मगर पेड़ हरे भरे पेड़  शीलता प्रदान करने वाले पेड़  पर्यावरण को सुरक्षा प्रदान करने वाले पेड़ विकसित देशों से लाये गए पैसों से लगाये गए ये पेड़    तो काटे ही जाते हैं काटे जा रहे हैं क्या इसका कोई सुरक्षित विकल्प है ?

5 comments:

राज भाटिय़ा said...

कभी कभी आवादी के हिसाब से पेड कातने पडते है, नयी सडके बनाने के लिये, या नये मकान बनाने के लिये, लेकिन सरकार को चाहिये की पहले नये जंगल लगाये, नयी सडको के किनारे नये पेड लगाये, खेतो मै नये पेड लगाने पर लोगो को प्रोत्साहन करे

jamos jhalla said...

सत्य उवाचे हो प्रभु

Amit said...

Trees are life line and not for cutting if indeed required then if 10 trees are cut then atleast 25 trees are to be planted some where. The spped of tree planting is to be more than the speed of population growth.

sm said...

rules are there but not one follows them.
as our laws are useless and toothless with loopholes.

Everymatter said...

basically govt. acquire agricultural land for residential and commercial purpose

use the forest land for defence, roads and other purpose

in the above process trees are destroyed like anything

why the govt. do not develop the area which has very less number of trees and before initiation of any project their must be funds raised against the number of trees to be cut and use that fund to plant more trees without any corruption.