Sunday, May 16, 2010

पेंशनपेंशनरअधिकार है सरकार का दाइत्व है ना की ओब्लिगेतोरी पेंशनसमय परहीदो

सरकारी कर्मचारी जब सेवानिवर्त ही जाता है तो उसके बुढ़ापे का सहारा एक मात्र [पूरे जीवन की कमाई के रूप aurमें ]पेंशन ही रह जाती है| बुढ़ापे की एक मात्र भरोसे मंद इस पेंशन रूपी लाठी के प्रति उसकी विशेष रूप से भावनाएं जुडी रहती हैं|शायद इसी लिए पेंशन समय पर ना मिलने+ कम मिलने या उसकी कोई समस्या की कोई सुनवाई ना होने पर उसकी भावनाओं को ठेस [स्वाभाविक ]पहुँचती है|ऐसा ही रक्षा  लेखा पेंशनरों क साथ हो रहा है|इन्हें मेरठ में पेंशन समय पर नहीं दी जा रही सब तरफ फ़रियाद करने पर भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो इन्होने  बुढ़ापे में संघर्ष करने को एक रक्षा लेखा पेंशनर कल्याण संघ का गठन कर लिया है| और मांग की है की  पेंशनपेंशनरअधिकार है+ सरकार का दाइत्व है ना की ओब्लिगेतोरी पेंशनसमय परहीदो
           संघ के अध्यक्ष आर.बी.एस.शिशोदिया और महा सचिव आरडी त्यागी को बनाया गया है|इन्होने केन्द्रीय रक्षा मंत्री ऐ.के.अन्थोनी ,रिजर्व बेंक और रक्षा लेखा महानियंत्रक श्रीमती नीता कपूर और नियंत्रक पेंशन आर.एन.दास को पत्र लिख करपेंशन समय पर दिलाने की मांग की है|श्री त्यागी से प्राप्त डिटेल्स इस प्रकार है|
       [१]भारत सरकार के आदेशानुसार पेंशन का भुगतान माह के अंतिम कार्य दिवस को किया जाना चाहिए
      [२]रक्षा पेंशन का भुगतान भारत सरकार द्वारा भारतीय स्टेट बैंक +रिजर्व  बैंक द्वारा किया जाताया है
      [३]एस.बी.आई.के माध्यम से चेक सम्बंधित बैंकों को भेजे जाते हैं
      [४]इन बैंकों [सभी नेशनलाइज्द ]में पेंशनरों के एकाउंट्स में क्रेडिट किया जाता है|
      [५] इस सारी कवायद पर आर.बी.आई. की सहमति है या फिर किसी विभाग की कोई आपति भर ही हैयह भी स्पस्ट नहीं है|
         समस्या यहाँ शुरू होती है |एस.बी.आई.के  जारी चेकों पर भुगतान  की तिथि के स्थान पर भुगतान की तारीख के बजाये पेएबलआन या नाटपेएबल बिफोर लिखा जाता है|बेशक ये चेक समय से पूर्व ही बैंकों में पहुचा दिए जाते हैं मगर नोडल [एस.बी.आई]में इन्हें स्वीकार नहीं किया जाता क्योंकि इस पर पेएबल आन लिखा होता है
        पेएबल आन लिखी तारीख पर ही चेक एस.बी.आई. द्वारा स्वीकार किया जाता है|ऐसे में इस पेएबल तारीखया उसके बाद ही  पेंशन सम्बंधित बैंकों को और फिर पेंशनरों के एकाउंट्स में क्रेडिट होती हैं|इस प्रक्रिया में पेएबल डेटके तीन चार दिनों के बाद ही पेंशन क्रेडिट होती है| संघ का कहना है की पेंशन तो महीने में एक ही बार मिलनी है फिर ये लम्बी प्रक्रिया क्यूँ?चेकों पर केवल पेंशन चेक या फिर  पेएबल ओं लास्ट डेट ऑफ़ दी मोंथ ही लिखा जाए|
      इस विषय में बैंकों का कहना है की पेंशन वितरण तो ओब्लिगेतरी है इससे बैंकों को कोई लाभ नहीं मिलता|संघ का आरोप है की  कर्मचारी की पूरी जीवन भर की सेवा के एवज में ही पेंशन दी जाती है यह सरकार का दाइत्व है ना की ओब्लिगेतोरी

6 comments:

राज भाटिय़ा said...

बहुत अजीब बात है

कडुवासच said...

...अब क्या कहें ... बेहद प्रसंशनीय पोस्ट !!!

रंजना said...

saarthak aur saraahneey prayaas hai...

sm said...

this is Indian Culture.
india is great
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thanks for sharing

jamos jhalla said...

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jamos jhalla said...

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