Tuesday, May 19, 2009
बिजली जाती कहाँ है ?
अगर हुकुमरानों के १९ घंटा बिजली देने के दावे पर यकीन कर भी लिया जाए तो प्रशन उठता है की जब यहाँ मात्र ३ घंटे बिजली मिलती है तो शेष १६ घंटे की बिजली जाती कहाँ हैहुकुमरानों की दलील है की यह लाइन लॉस के कारण है इसे रोकने के लिए बिजली वितरण का निजी करण जरूरी हैइससे सुधार तो कया उल्टे बिजली कर्मियों ने भी झटके मारने शुरू कर दिए है
बिजली कर्मियों की माने तो सारा गोरख धंधा अधिकारियों का हैवैसे अधिकारी गण अपने दायित्व से बचने केसाफ़ प्रयतन करते नज़र आते हैं इस कथन के समर्थन में कहा जा सकता हे कि
[१]बिजली के उत्पादन की गति को बढाने के कोई परिणाम दायक कार्य दिखाई नहीं देते
[२]बिजली प्रवाह में रूकावट आने पर उसे ठीक करने के लिए जब लाइन मेनखंभे पर चड़ता हे तो मिस मेनेज मेंट के कारण बेचारा खंभे पर ही लटका रह जाता है
[३]वोट बैंक के तुस्टी करण के चलते बिजली चोरी को रोकने के परिणाम दायक कदम नही उठाय गए हैं
[४]इसके फलस्वरूप बिजली लगातार महँगी हो रही है
[५]अखबारों में मंहगे विग्ह्यापन छपवाए जाते हे इनमे व्यावसायिक नज़रिए से शिकायतें माँगी जाती हे मगर बिजली की अघोषित कटौती या चोरी के विषय में कुछ नही कहा जाता
[6 ]मिस मेनेज मेंट का आलम यह है की में जब सुबह की सैर करके लौटता हूँ तो छावनी परिषद् के माल रोड पर लगे लैंप पोस्ट जले होते हैसूरज देवता सर से थोडा नीचे चमक रहा होता है और सड़क के किनारों पर लगे मरकरी लैंप अपनी धुधिया रोशनी से सूरज देवता से प्रतियोगिता करते नज़र आते हैं
Thursday, May 14, 2009
वरुण पूत के पावँ पालने में नज़र आए
ओये झाल्लेया त्वाडे प्रदेश में ये कया जुल्म हो रहा है बालक वरुण गांधी पर जबरदस्ती रासुका लगा कर उस बेचारे को लोक सभा क पहले चुनाव में ही सीखचों के पीछे डालकर पूत को पालने मे ही ख़त्म करने की कौशिश की जा रही है भला हो सुप्रीम कोर्ट का जिन्होंने बच्चे पर से रासुका हटा कर गांधी को एक बार फिर निशाना बनने से रोक दिया
झल्ला
आपके बालक ने रासुका का चोला ओउड़ कर देश प्रसिद्धी तो प्राप्त कर ही ली हैअब रासुका क आवरण की जरूरत ही कया है?रहा चुनावी खर्च तो चतुर सुजान वरुण ने माया सरकार पर १० लाख का दावा भी ठोक दिया है
भापा जी आपके पूत के पाँव पालने में नज़र आने लग गए है
Sunday, May 10, 2009
१० मई १८५७ के शहीदों को उचित सम्मान दें
इतिहास कारों के अनुसार इस प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जो सबसे बड़े सबक मिले दुर्भाग्यवश उन्हें आज़ादी के बाद की सरकारों और समाज ने महत्वपूर्ण नही समझा इस क्रान्ति का इतिहास हमें बताता हे कि
[1]हिन्दू और मुस्लिम ,ब्रह्मण मंगल पांडे ,बाल्मीकि मातादीन ,गुज्जर धन्ना सिंह कोतवाल और हजारों जाट ठाकुर एक ही काज के लिए इख्ठा लड़े और देश के लिए शहीद हुए शासकों कि क्रूरता के चलते हजारों देशभक्तों के शव कई दिनों तक पेड़ों पर लटके रहेगाँव के गावं जला दिए गए शहीदों कि आत्मा कि शान्ति के लिए धर्मा नुसार क्रियाक्रम भी नहीं हुएइसे विडंबना ही कहा जाएगा कि शहीदों के नाम पते तक किताबों में दर्ज नहीं हे
[२] यध्पि इस क्रान्ति को निर्ममता से दबा दिया गया था फिर भी आज़ादी कि जंग में यह क्रांति एक चिंगारी बनी जिससे प्रेरणा पा कर बाद में आज़ादी के मतवालों ने ब्रिटिश हकुमत को उखार फैंका
[३]ब्रिटिश फौज में एन.टी। [नेटिव]और बी.टी.[ब्रिटिश]कंपनियाँ थी नेटिव फौज का विवरण तो मग्निफायिंगग्लास लेकर भी नहीं मिलता हाँ मारे गए ब्रिटिश अधिकारिओं को सैंट जॉन कब्रिस्तान में दफनाया गया जहाँ उनकी कब्रों के अवशेष अभी तक हेये लोग एन.टी.फौज के हाथों मारे गए थे
[४]एक तत्कालीन जनरल जिलिपसी जिन्होंने नेपाल के चुंगल से इस चेत्र को आजाद करवाने के लिए गोरखों से यूद्ध किया था उनकी भव्य कब्र भी हे
इस क्रान्ति के कुछ निशाँ अभी भी कायम हे मगर शाषन प्राशाशनऔर प्रबुद्ध नागरिकों कि उपेक्षा के चलते लगातार जर्जर होते जा रहे हे
झल्ले विचारानुसार क्रान्ति कि इस धरोहर को बचा कर या संजोने के लिए निम्न कदम उठाए जा सकते हे
[१]१० मई १८५७ कि क्रान्ति के शाहीदों कि आत्मा कि शान्ति के लिए सामूहिक रूप से प्राशाशन और जनता द्वारा सर्व धर्म क्रिया करम करवाए जाने चाहिएइससे न केवल उनकी आत्माओं को शान्ति मिलेगी वरन देश में साम्प्रदायिक सौहार्द [जिसकी आज बेहद जरूरत हे]कायम होगासभी धर्म वर्ण जाति के लोगों में सौहार्द कायम होगा [इसकी भी आज बेहद जरूरत हे]
[२]सैंट जॉन कब्रिस्तान के साथ साथ १०मै १८५७ के साथ जुडी इमारतों, स्थानों का टूरिस्म के नज़रिए से रख रखाव किया जाना चाहिए इससे प्राप्त आय से भवनों का रखरखाव करने में आसानी होगी
[३]१० मई को मेरठ में लोकल अवकाश होता हे इस दिन कुछ लोग छोटा मोटा कार्यक्रम आयोजित करते है और प्रशासनिक प्रभात फेरी निकाली जाती हे इन सभी को मात्र ओउप्चारिकता ही कहा जाता हेबिना किसी अहम् या प्रेस्टीज ईशु के कमसे कम समूचे मेरठ के सभी धर्म जाति या वर्ण के लोगों को शामिल किया जाना होगा
Saturday, May 9, 2009
नसबंदी जबरदस्ती नहीं
ओये झाल्लेया ये तो कमाल हो गया गुदड़ी में लाल हो गयावरुण गांधी आज सबके लिए एक महत्वपूर्ण सवाल हो गयाउस लड़के ने एलानिया ये कह दिया हे की अगर सत्ता में आए तो अपने पिता की तर्ज पर नस बंदी कार्यक्रम लागू कर देंगे
झल्ला
शुक्र हे १ अरब होने के बाद ही सही किसी ने तो आबादी के विषय में सोचा
लेकिन संजय गांधी के समय जो अंधाधुन्द कुआरोन की भी नसबंदी कर दी गयी थी उस बुराई से बच ते हुए इस योजना को लागू किया जा सकता हे चाइना में पर्दूषण रोकने के नाम पर भी एक परिवार एक बच्चा कार्यक्रम सफलतापूर्वक चलाया जा रहा हे
Friday, May 8, 2009
अमरीकी नीति से भारतीय अभिशिप्त
ओये झाल्लेया ये कया हो रहा है?अमरीका के नए हुकुमरान ओबामा ने यह फरमान जारी कर दिया है कि भारतीय आई.टी .स्वर्ग बंगलूर में आउट सोर्सिंग करने वाले अमरीकीओं को अब अमरीका मे टैक्स छूट नहीं दी जायेगीइसके बदले अमरीका में भैंस पर निवेश करने वालों को प्रत्येक सुविधा दी जायेगीइससे तो यार बेशक वहाँ दूध,दही और माखन कि नदियाँ बहने लगेंगी मगर यार हसाडे मुल्क में तो डालडे [आयल हाइदरो ]के भी लाले पड़ जाने हे लाखों खर्च करके प्रोधयोगिकी में महारथ हासिल करने वाले प्रतिभाओं का भविष्य के साथ साथ वर्तमान तक कर्जे कि सूखी रोटिआं खाने को अभिशिप्त हो जाएगा
झल्ला
भोले साहब जी यह तो वोही गल हुई कि अमरीका ने भारतीयों कि मदद से सर्वत्र सूचना प्रोद्योगिकी के कूऐं खोदे खुशहाल भविष्य के मन भावन सपने बेचे अब जब इन कूओं से मीठा और ठंडा पानी निकलने लगा हे तो इन कूओं में पाइप लगा कर सारा पानी अमरीका ले जाना चाहते हे हसाडे होन हारों के साथ साथ उनके परिवारों को भी क़र्ज़ के बोझ तलेछोड़ जाना चाहते हे टी.सी.एस.जैसी रास्त्रवादी कंपनी भी अपने कर्मिओं के वेतन घटा कर अपना लाभ बड़ा रहे हे मुल्क के नीतिनिर्माताओं को वोह कऊआ [क्रो] बना कर छोड़ रहे हे जो हंस कि नक़ल करने चला था मगर अपनी चाल भी भूल गया
Tuesday, May 5, 2009
नेपाली फौज में माओवादिओं को आरक्षण ,बिल्कुल नहीं
Saturday, May 2, 2009
पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों पर तालिबानी अत्याचार
एक भारतीय गुर सिख
ओये झल्लेया पाकिस्तान में ये कया कुफ्र कमाया जा रहा है आज़ादी के ६० सालों के बाद अब फिर से पाकिस्तान में हिंदू और गुर सिखों पर अत्याचार किया जाने लगा है भारतीयकाश्मीर से विस्थापित हुए हिंदू पंडितों की तरह ही अब पाकिस्तान में हिंदू और गुर सिखों को पंजे साहब आदि गुरुद्वारों में शरण लेने को बाध्य किया जा रहा हैयदि ऐसा ही चलता रहा तो पाक में नाम मात्र को बचे अल्पसंख्यकों को दुबारा देश विभाजन का दंश झेलना होगा
झल्ला
ओ भापा जी पाक के हिंदू और गुर सिखों पर तालिबानी कहर के तीर से हसाडे सोणे ते मन मोहणे पी एम् की पवित्र पगडी को निशाना बनाया जा रहा है पाक की सरकार और फौज की नाकामी को देखते हुए अब कुछ करने का वक्त आ गया हैबर्लिन की दीवार की तरह ही अब भारत और पाक को बांटने वाली अंग्रेजों की रेखा को मिटा कर इस सर दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा पाना होगा