Sunday, December 28, 2008
कश्मीर मेकबीरकीपंचमेल खिचरीकीजरूरतझल्लीकलमसे
ओये झाल्लेया हुन की होसी ?हसाडे स्वर्ग जैसे कश्मीर मेंजनता ने आतंकवाद को धत्ता बताते हुए प्रथम श्रेणी वाले अंकों मे मतदान करके घाटी मे लोकतंत्र को और मजबूती प्रदान करदी मगर दुर्भाग्य से फिर एक बार लटकी हुई विधान सभा ही बन सकीअब फिर खिचरी सरकार को झेलना होगा जम्मू ,कश्मीर घाटी और लेह लद्दाख के तरानो को समूह गान मे सुनने का स्वर्गीय आनंद नहीं मिलेगा अपनी अपनी ढपली और अपना अपना राग से ही काम चलाना होगाअगर ऐसा ही चलता रहा तो पाकिस्तान से तस्करी से लाये जा रहे कर्कश नगारों मे सभी कुछ दब कर रह जाना है
झल्ला
ओ जी बात तो आप ठीक ही कह रहे हो मगर पिछले अनुभवों से खिचरी के स्वाद के सभी आदी हो चुके हैं आप लोगों ने तो अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा दी अब आपके नुमायिन्दों को अपने अपने सुर बदलने होंगे इस खिचरी मे अलगाववाद के कंकर पत्थर दाल कर इसे बेस्वाद करने के बजाये संत कबीर की पंचमेल खिचरी का विश्व प्रसिद्ध स्वाद सभी को चखाना होगा ढपली और रागों को एक सुर मे ढाल कर राग भारतीय बजा कर तस्करी के नगारों का सामना किया जा सकता हैतभी सही मायनो मे कश्मीर स्वर्ग बनेगा
Friday, December 26, 2008
गर ज़ंग लाज़मी है तो ज़ंग ही सही झल्ली कलम से
ओये झ्ल्लेया ये कया हो रहा है?हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के कथित रहनुमाओं हठधर्मी ,वोट बैंक का लोभ,काले धन की आमदनी की चमक और बेकाबू, अपरिपक्व जुबान के चलते आज आतंकवादी {दोनों देशों मैं }निरंकुश हो गए हैं इसी के फल स्वरुप आज दोनों गवांधी{पढ़होसी } मुल्क एक दूसरे को नेस्तेनाबूत करने पर तुले हुए हैं
सीमा पर यदि किसी ने चिंगारी डाल दी तो समझो हो जायेगी ठा ठा ठा
झल्ला
ओ भोले बादशाहों हसाडे मुल्क की संसद में तो पूरे साल भर मैं केवल ५० दिन मैं ही बिना चर्चा के ही निर्णय लेने की क्षमता है लेकिन ग्वान्ढ मुल्क तो फौजी आदेश पर लेफ्ट राइट करता रहता है इस पर भी आतंकवाद खुल्ले मैं घूम रहा है एक के बाद दूसरे मुल्क को स्वादिस्ट चेरी समझ कर हलक के उतार रहा है झाल्लेविचारानुसार भस्मासुर का रूपधर चुके आतंकवाद को समाप्त करने के लिए यदि एक और ज़ंग लाजमी हो तो कदम बरहाना दानिशमंदी होगी
Sunday, December 21, 2008
फौजी करवट को समझो झल्ली कलम से
ओये झ्ल्लेया ये कया हो रहा है परहोसी पाक के नापाक आतंकवादी गुटों को सबक सिखाने के लिए भारतीय फौज को एलर्ट करके बेचारे फौजियों की छुटियाँ भी रद्द कर दी गयी हैं ऐसा लग रहा है की अब हसाडे सोणे प्रधान मंत्री के जिस्म मैं स्वर्गीया इंदिरा जी की आतम सम्मान के लिए मर मिटने वाली आत्मा आ गई है अब अगर पाक ने अपने नापाकों पर काबू नहीं किया तो युद्ध हुआ ही समझो
झल्ला
ठण्ड रखो जी ठण्ड रखो जी कहते कहते हसाडा मुल्क ही ठंडा हो चला था यदि पाक और उसके गोड फादरों ने भारत की इस करवट को नहीं समझा तो १९७१ की ज़ंग की पुनरावर्ती हुई समझो झ्ल्लेविचारानुसार भारतीय फौज को मोरल सपोर्ट के लिए देश के अन्दर भी ज़ंग खा रहे आंतरिक सुरक्षा के सभी तंत्रों को तेल देकर उनके नट पेंच कसने होंगे इसके लिए अगर जरूरी हो तो सिविलियनों की भी छुटियाँ रद्द करने के विकल्प खुले रखने होंगे
Monday, December 8, 2008
२६/११२००८के बाद तो ईद की सच्ची मुबारकबाद दो
२६ नवम्बर २००८
को मुम्बई मैं हुए पाकिस्तान ट्रेंड आतंकवादियों के हमले से त्रस्त अमेरिका के दबाव के कारण पाकिस्तान ने अपनी आस्तीन मे पल रहे इन जहरीले आतंकवादी रूपी नागों को समाप्त करने का एलान कर दिया है
ऊपरी तौर पर यह बरबोला परन्तु प्रसंशनीय कदम है आतंकवादी ठिकानो पर हमला और आतंकवादी जैश के सरगना को नज़र बंद करने का एलान अति प्रशंसनीय है ५९ घंटों तक चले अभियान मे आतंकवादियों को देश के वीर जवानो ने मुम्बई मे ही मार गिराया यह उत्साह जनक उपलब्धि है धरम ,छेत्र ,भाषा के नाम पर देशतोरु कथित रास्ट्रीय नेताओं के मुख पर लगाम स्वतः लग गई यह संतोषजनक रहा ये लोग अभी तक अपने बिलों मे घुसे हुए हैं यह अति संतोष जनक है २६ नवम्बर की काली घटना /दुर्घटना के बाद ५ राज्यों में चुनाव हुए दो राज्यों में भाजपा और तीन में कांग्रेस का परचम लहराया इस नाज़ुक मौके पर जनता ने जनार्दन बन कर छोटे मोटे बरबोलों को दरकिनार करके विकास के लिए और आतंकवाद के विरुद्ध समर्पित बरे दलों को समर्थन दिया यह सुधारात्मक कदम रहा
अब आतंवाद के विरुद्ध ठोस कार्यवाही की उम्मीद की जा रही है यह विचारणीय प्रशन वाचक ?है एक्सपर्ट्स के अनुसार नागों के जहर मे एक अजीब नशा होता है
पाकिस्तान क्यूंकि जहरीले आतंकवादी रूपी नागों को अपनी आस्तीनों में पालने का आदी {द्रुग्स एडिक्ट }हो चुका है इसी लिए नागों मुक्ति पाना अब उसके लिए आसान नहीं हैयह चिंता का विषय है jhallevicharaanusaar नाग पालने वाले आस्तीनों की कुर्बानी दे कर एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी जा सकती है